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    ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के 500 दिन पूरे, पंजाब को नशा-मुक्त बनाने का संकल्प हुआ और मजबूत: डॉ. बलबीर सिंह

    Viral Punjab NewsBy Viral Punjab NewsJuly 15, 2026Updated:July 15, 2026No Comments8 Mins Read
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    पंजाब को पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के लिए भगवंत मान सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा शुरू किया गया ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। यह अभियान सख्त कानूनी कार्रवाई, उपचार एवं पुनर्वास के साथ-साथ सतत जागरूकता और रोकथाम की त्रिस्तरीय रणनीति के माध्यम से उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है।

     

    अभियान के 500 दिन पूरे होने के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की दूरदर्शी सोच के अनुरूप इस पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और राज्य के भविष्य को सुरक्षित बनाना है। उन्होंने कहा, “हमारे अभियान का मूल मंत्र ‘प्रोटेक्ट, हील एंड प्रिवेंट’ (सुरक्षा, उपचार और रोकथाम) है। यह केवल नशों के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने का मिशन है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्त करने का जो वादा किया था, उसे हमारी सरकार पूरी ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति के साथ पूरा कर रही है।”

     

    पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, जेल और सामाजिक सुरक्षा विभागों को एक मंच पर लाकर समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है। यह अभियान एक साथ तीन स्तरों पर कार्य कर रहा है—नशा तस्करों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, नशे की लत से जूझ रहे लोगों का उपचार एवं पुनर्वास तथा आने वाली पीढ़ियों को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक रोकथाम।

     

    अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि 1 मार्च 2025 को अभियान शुरू होने के बाद से अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 52,432 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पूरे पंजाब में 73,300 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बड़े नेटवर्क संचालित करने वाले 621 प्रमुख तस्कर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भगवंत मान सरकार नशा नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

     

    उन्होंने कहा कि अभियान की सबसे बड़ी सफलता जनता का बढ़ता विश्वास और सक्रिय भागीदारी है। पिछले 500 दिनों में ‘सेफ पंजाब हेल्पलाइन’ (97791-00200) पर 46,342 सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर 22,960 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इससे स्पष्ट है कि लोगों का सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

     

    पिछली सरकारों की तुलना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अकाली सरकार के 10 वर्षों के दौरान 2,817 किलोग्राम हेरोइन तथा कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों में 2,412 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। इस प्रकार 15 वर्षों में कुल 5,229 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई, जबकि भगवंत सिंह मान सरकार ने मात्र चार वर्षों में 6,608 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है।

     

    उन्होंने कहा कि ये आंकड़े साबित करते हैं कि ईमानदार नीयत और स्पष्ट नीति से ही ऐसे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। पंजाब ने एंटी-ड्रोन निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है और नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को और तेज किया है।

     

    डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने किसी बड़े नशा तस्कर की संपत्ति जब्त नहीं की थी, जबकि वर्तमान सरकार ने 847 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाब में अपराध करके कोई भी बच नहीं सकेगा।

     

    उन्होंने बताया कि पंजाब ने एनडीपीएस मामलों में 89 प्रतिशत की दोषसिद्धि दर हासिल की है, जो देश में सर्वाधिक दोषसिद्धि दरों में से एक है। यह सरकार द्वारा की गई जांच और कानूनी कार्रवाई की गुणवत्ता को दर्शाता है।

     

    सरकार के पुनर्वास प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब ने नशा मुक्ति उपचार व्यवस्था का बड़े स्तर पर विस्तार किया है। वर्तमान में राज्य में 213 सरकारी एवं निजी नशा मुक्ति केंद्र, 90 पुनर्वास केंद्र तथा 547 आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिक संचालित हैं। सभी सरकारी केंद्रों में उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।

     

    उन्होंने बताया कि ओओएटी कार्यक्रम के तहत 10 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है तथा अभियान शुरू होने के बाद 38,000 से अधिक मरीजों का सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कर उपचार किया गया है।

     

    उन्होंने कहा कि सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए के अंतर्गत 10,917 लोगों को कानूनी कार्रवाई से छूट देकर उन्हें सजा के बजाय उपचार का अवसर प्रदान किया है, ताकि वे अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें।

     

    जेल सुधारों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य की सभी 19 जेलों में ओओएटी सुविधा शुरू की गई है, जबकि 10 केंद्रीय जेलों में समर्पित नशा मुक्ति एवं वेलबीइंग क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, ताकि नशे की समस्या से जूझ रहे कैदियों को उचित उपचार और पुनर्वास मिल सके।

     

    नई पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘सूरमा–एंबेसडर ऑफ रिकवरी’ कार्यक्रम के अंतर्गत नशे से पूरी तरह उबर चुके लोग अब दूसरों को उपचार और नई जिंदगी की ओर प्रेरित कर रहे हैं। उनकी जीवन यात्रा हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

     

    उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ भी शुरू किया है, जो देश का पहला सरकारी फेलोशिप कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षित युवा पेशेवरों की भागीदारी के माध्यम से नशा रोकथाम के प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।

     

    डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार बच्चों और किशोरों में नशे की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दे रही है। शिक्षकों को ‘मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड’ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे नशे के शुरुआती संकेत पहचान सकें, विद्यार्थियों को उचित परामर्श दे सकें और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध करा सकें। स्कूलों में माइंडफुलनेस सत्र और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, क्योंकि रोकथाम की शुरुआत कक्षा से होती है।

     

    उन्होंने बताया कि सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों की क्षमता 1,500 बिस्तरों से बढ़ाकर 5,000 बिस्तर कर दी है। मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में काउंसलर तथा क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नियुक्त किए गए हैं। इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वाले लोगों के लिए छह सरकारी अस्पतालों में लिक्विड मेथाडोन थेरेपी शुरू की गई है तथा दोबारा नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए सामुदायिक फॉलो-अप कार्यक्रम भी आरंभ किए गए हैं।

     

    उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मरीज का उपचार करना नहीं, बल्कि उसे सम्मानपूर्वक समाज में पुनर्स्थापित करना भी है। ‘कम्युनिटी ब्रिज प्रोग्राम’ के माध्यम से जब मरीज अपने गांव लौटते हैं तो काउंसलर लगातार उनका मार्गदर्शन और सहयोग करते रहते हैं।

     

    जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि 12,000 से अधिक ग्राम रक्षा समितियां, जिनमें 1.25 लाख से अधिक सदस्य शामिल हैं, जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा नशा तस्करी की सूचना देकर कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सहायता कर रही हैं। ‘पिंडां दा हाल एक्शन प्लान’ तथा राज्यव्यापी ई-रिक्शा जागरूकता अभियान ने भी लोगों की भागीदारी को और मजबूत किया है।

     

    सीमा पार से हो रही नशा तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी व्यवस्था और मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से लगती सीमा के कारण पंजाब को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। पंजाब सरकार ने एंटी-ड्रोन प्रणाली और कानून लागू करने की व्यवस्था को मजबूत किया है, लेकिन सीमा सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। यदि आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जाए तो नशीले पदार्थ लेकर आने वाले ड्रोन निश्चित रूप से रोके जा सकते हैं।

     

    उन्होंने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट तथा पंजाब के बाहर की जेलों से संचालित कथित आपराधिक नेटवर्क के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब पूरे देश की ओर से यह लड़ाई लड़ रहा है और उसे केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है।

     

    मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए जनभागीदारी, संवेदनशीलता, पुनर्वास और युवाओं की सुरक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवंत सिंह मान सरकार पंजाब को पूर्णतः नशा-मुक्त बनाने तक इस मिशन को निरंतर जारी रखेगी।

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