Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    viralpunjabnews.com
    • punjab
    • chandigarh
    • haryana
    • himachal
    • delhi
    • up
    viralpunjabnews.com
    You are at:Home»punjab»25 लाख का जुर्माना और उम्र कैद की सजा… क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक?
    punjab

    25 लाख का जुर्माना और उम्र कैद की सजा… क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक?

    Viral Punjab NewsBy Viral Punjab NewsApril 13, 2026Updated:April 13, 2026No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

     पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं।

    प्रस्तावित कानून के अनुसार, बेअदबी के मामलों में न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान रखा गया है, जिसे 20 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसके साथ ही दोषियों पर दो लाख रुपए से लेकर दस लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साजिश के तहत सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से इस तरह का अपराध करता है, तो उसके लिए और भी कड़ी सजा तय की गई है। ऐसे मामलों में दोषी को दस साल से लेकर उम्रकैद (मृत्यु तक) जेल में रहना होगा। इसके अलावा 5 लाख से 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध में सहयोग करने या प्रयास करने वालों को भी सख्त सजा दी जाएगी। प्रयास करने पर तीन से पांच साल की सजा और एक से तीन लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

    इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी।

    जानें क्या खास है इस विधेयक में-

    परंपराओं के अनुरूप शब्दावली: संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके।

    साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा।

    संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा:

     

     मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

    हर स्वरूप का रखा जाएगा रिकॉर्ड:

     

    विधेयक के तहत एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सभी सरूपों का एक केंद्रीय रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें हर सरूप को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी छपाई, स्थान, भंडारण और संरक्षक की जानकारी दर्ज की जाएगी। यह रजिस्टर भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में रखा जाएगा और इसे निर्धारित समय के भीतर सार्वजनिक भी किया जाएगा।

    बेअदबी की परिभाषा में बदलाव:

     

     बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।

     

    जानें क्यों नहीं राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक

     

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानभा में बताया कि यह कानून 2008 के मौजूदा अधिनियम में संशोधन के रूप में लाया गया है और इसे लागू करने की तिथि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर तय की जाएगी।

    पहले भी इस तरह के विधेयक लाए गए थे, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बार सरकार ने इसे और अधिक स्पष्ट, सख्त और प्रभावी बनाकर पेश किया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह एक राज्य का कानून है और इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक नहीं है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसे लागू किया जा सकेगा।

    सरकार का मानना है कि यह विधेयक न केवल धार्मिक पवित्रता की रक्षा करेगा, बल्कि पंजाब में शांति, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

     

    जानें पहले कब बेअदबी कानून पर हुए प्रयास

     

    पंजाब में पवित्र ग्रंथों के सम्मान और बेअदबी के मामलों पर सख्त कानून बनाने को लेकर पिछले डेढ़ दशक में लगातार प्रयास होते रहे हैं। अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर कानून बनाए या संशोधन लाने की कोशिश की, लेकिन कई बार इन्हें अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।

    2008 अकाली-भाजपा सरकार का मूल कानून:

     

    साल 2008 में अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम’ लागू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रुर ग्रंथ साहिब की गरिमा और सम्मान को बनाए रखना था।

    इस कानून के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई और वितरण का विशेष अधिकार दिया गया। उल्लंघन पर अधिकतम 2 साल की सजा या 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान था। हालांकि, इसमें बेअदबी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान नहीं था।

    2016 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किए प्रयास:

     

    साल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में सरकार ने नए संशोधन विधेयक पेश किए। इनका उद्देश्य बेअदबी के दोषियों को उम्रकैद तक की सजा देना था।

    लेकिन केंद्र सरकार ने इन्हें यह कहते हुए लौटा दिया कि प्रस्ताव में केवल एक धर्म के पवित्र ग्रंथ को ही विशेष संरक्षण देने की बात है, जो संवैधानिक संतुलन के अनुरूप नहीं है।

    2018 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय भी हुए प्रयास:

     

    साल 2018 में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार ने संशोधित विधेयक पेश किया। इसमें भगवत गीता, कुरान और बाइबल को भी शामिल किया गया। पंजाब विधानसभा ने इसे पारित कर दिया, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी न मिलने के कारण यह कानून लागू नहीं हो सका।

    2023-24 में नए आपराधिक कानून से बदलाव के कारण देश में पुराने आपराधिक कानून इंडियन पीनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू हो गई। चूंकि 2018 का विधेयक पुराने कानून पर आधारित था, इसलिए वह अप्रासंगिक हो गया और आगे नहीं बढ़ पाया।

    2025 में आम आदमी पार्टी का नया विधेयक पेश:

     

    साल 2025 में आम आदमी पार्टी सरकार ने ‘पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक’ पेश किया। इसमें सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथों को शामिल करते हुए सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक रखने का प्रस्ताव दिया गया। इस विधेयक को आगे विचार के लिए चयन समिति को भेज दिया गया।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Viral Punjab News
    • Website

    Related Posts

    5 सितंबर को पंजाब कैबिनेट की अहम बैठक, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर

    September 3, 2026

    कर्मचारियों के DA मुद्दे पर अमन अरोड़ा का बड़ा बयान, बोले- सरकार और कर्मचारी एक-दूसरे के पूरक

    September 3, 2026

    आप का अकालियों पर पलटवार, बलतेज पन्नू ने अमरदीप ग्रेवाल की सीनियर भाजपा नेताओं के साथ गुरी चाहल की अकालियों के साथ दिखाईं तस्वीरें

    September 3, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    कर्मचारियों के DA मुद्दे पर अमन अरोड़ा का बड़ा बयान, बोले- सरकार और कर्मचारी एक-दूसरे के पूरक

    September 3, 2026

    आप का अकालियों पर पलटवार, बलतेज पन्नू ने अमरदीप ग्रेवाल की सीनियर भाजपा नेताओं के साथ गुरी चाहल की अकालियों के साथ दिखाईं तस्वीरें

    September 3, 2026

    पंजाब की वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा अपडेट, 13 अगस्त की सूची अंतिम नहीं थी

    September 3, 2026

    अभिनंदन वर्धमान ने एयरफोर्स से लिया रिटायरमेंट, अब कमर्शियल पायलट के तौर पर उड़ाएंगे विमान

    September 3, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • punjab
    • chandigarh
    • haryana
    • himachal
    • delhi
    • up
    © 2026 Viral Punjab News. All Rights Reserved.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.