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    केजरीवाल की बड़ी जीत, आबकारी केस से हटीं जज स्वर्ण कांता शर्मा

    Viral Punjab NewsBy Viral Punjab NewsMay 15, 2026Updated:May 15, 2026No Comments7 Mins Read
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    तथाकथित आबकारी केस से अंततः जज स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग कर लिया। आम आदमी पार्टी ने जज स्वर्ण कांता शर्मा के आबकारी केस से अलग हटने के फैसले को अरविंद केजरीवाल की बड़ी जीत बताया है। “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से हटने के फैसले पर कहा कि सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।

     

    “आप” का कहना है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य लोगों ने हितों का टकराव बताते हुए जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से खुद को अलग करने का अनुरोध किया था। इस बाबत अरविंद केजरीवाल ने एक पत्र लिख कर 10 वाजिब वजहें बताई थीं और उम्मीद जताई थी कि जज खुद को इस केस से अलग कर लेंगी। लेकिन जज स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए इस केस से अलग नहीं होने का फैसला सुनाया था। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने राजघाट जाकर गांधी समाधि पर नतमस्तक हुए और उनके सत्याग्रह के मार्ग पर चलते हुए इस केस में उनकी कोर्ट में पेश न होने का फैसला लिया था।

     

    आम आदमी पार्टी का कहना है कि अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि उनकी कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह स्वीकार होगा और उस पर वह अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से हटने के लिए दस कारण बताए थे। इनमें से एक प्रमुख कारण यह है कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं और आबकारी केस में सीबीआई की तरफ से वकील सॉलिसिटर जनरल हैं जो जज के दोनों बच्चों बाॅस के तौर पर केस आवंटित करते हैं और उसके बदले में मोटी फीस भी सरकार की तरफ से दी जाती है। पिछले कुछ सालों में उनके बच्चों को सबसे ज्यादा केस आवंटित किया गया। अरविंद केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि जब जज के बच्चों के करियर सॉलिसिटर जनरल के हाथ में है तो वह उनके खिलाफ फैसला क्या दे सकती है?

     

    आम आदमी पार्टी ने कहा कि दूसरा प्रमुख कारण जज स्वर्ण कांता शर्मा का आरएसएस के अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में जाना है। अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में कई बार जज स्वर्ण कांता शर्मा के जाने की वजह से अरविंद केजरीवाल ने न्याय न मिलने आशंका जताई थी। इन प्रमुख वाजिब कारण बताने के बाद भी जज स्वर्ण कांता शर्मा ने केस से नहीं हटने का फैसला सुनाया।

     

    इसके बाद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए और सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

    —

     

    उधर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अवमानना नोटिस पर कहा कि खबर आ रही है कि हाई कोर्ट की माननीय जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और मेरे खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है। अपने फैसले के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बार-बार दो बातें दोहराईं। पहली बात जो वे बार-बार कहती रहीं कि वे यह अपनी किसी नाराजगी की वजह से नहीं कर रही हैं, बल्कि न्यायपालिका की साख और प्रतिष्ठा बचाने के लिए कर रही हैं। यह बात उन्होंने बार-बार दोहराई कि वे यह खुद के लिए नहीं कर रही हैं। दूसरी बात उन्होंने यह कही कि उनके पास दो रास्ते थे। एक आसान रास्ता और एक मुश्किल रास्ता और उन्होंने हर बार मुश्किल रास्ता चुना। इस विषय में मैं एक-दो बातें कहना चाहता हूं।

     

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहली बात तो यह है कि फैसले के दौरान जस्टिस शर्मा ने मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस और मेरे एक्स हैंडल का जिक्र किया। मुझे खुशी हुई कि वे मेरी प्रेस वार्ता देखती हैं। मैं पिछले एक हफ्ते से तीन साल की बच्ची के रेप का मामला उठा रहा हूं, जिसमें निचली अदालत के जज ने 57 साल के आरोपी को जमानत दे दी है। मुझे खुशी होती कि उन प्रेस वार्ताओं या मीडिया में चलती हुई क्लिपिंग से वे इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई करतीं, क्योंकि यह बहुत संजीदा मामला था।

     

    सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मैंने प्रेस वार्ता करके बताया था कि कैसे दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने एक मीडिया पर ऑन रिकॉर्ड बोला कि राउस एवेन्यू के स्पेशल सीबीआई जज ने अरविंद केजरीवाल और अन्य को आबकारी मामले में जो दोषमुक्त किया, वह मामला सेट करके हुआ है। इसका साफ मतलब है कि उन्होंने एक मौजूदा जज को भ्रष्टाचारी कह दिया। हमने इसके ऊपर प्रेस वार्ता में और वीडियो बनाकर भी कई बार बात रखी। मुझे खुशी होती अगर न्यायपालिका को बचाने के लिए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस मामले में भाजपा की मुख्यमंत्री के ऊपर अवमानना की कार्यवाही शुरू करतीं।

     

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसके अलावा मैंने 31 मार्च को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को बाकायदा सबूतों के साथ लिखा था कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने न्यायपालिका के एक जज को सेट बताया है, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं सिर्फ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को यह बताना चाहता हूं कि कानून यह नहीं कहता कि आसान या मुश्किल में से आसान रास्ते को छोड़कर मुश्किल को चुनना है। कानून की किताब में ऐसा कहीं नहीं है। जज को सिर्फ न्याय का रास्ता चुनना होता है। वे बार-बार कहती हैं कि उनके पास दो रास्ते थे, लेकिन न्याय की मंजिल में सिर्फ एक ही रास्ता होता है और वह सत्य व न्याय का रास्ता है। उसमें आसान या मुश्किल रास्ते नहीं होते।

     

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर मुश्किल रास्ता चुनना ही है, तो भाजपा की मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्यवाही की होती तो माना जाता कि यह मुश्किल रास्ता है। आम आदमी पार्टी या विपक्षी दल के नेताओं के ऊपर अवमानना का मामला चलाना मुश्किल रास्ता है, यह मैं नहीं मानता। न्यायपालिका की साख को बचाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए थी। यह बात एक्स, यूट्यूब सहित पूरे सोशल मीडिया व मीडिया में बार-बार हम लोगों ने उठाई है। मुझे अच्छा लगता अगर वे इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेतीं और उस पर कार्रवाई करतीं, क्योंकि हम लोग अगर उसकी शिकायत करेंगे तो हमें उसके लिए केंद्र सरकार की इजाजत लेनी पड़ेगी और वह सरकार इजाजत देगी नहीं।

     

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऊपर अवमानना की कार्यवाही तभी चल सकती है जब हाई कोर्ट या स्वयं सुप्रीम कोर्ट इसमें स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करे। लेकिन अफसोस की बात है कि इस मुश्किल रास्ते पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अब तक चलती हुई नहीं दिखी हैं।

     

    वहीं, वहीं, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि अंततः जस्टिस स्वर्ण कांता ने आबकारी नीति मामले से खुद को अलग कर लिया है!

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