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    पंजाब से 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए केंद्र चलाएगा विशेष ट्रेनें, CM मान की बैठक रही सफल

    Viral Punjab NewsBy Viral Punjab NewsApril 11, 2026Updated:April 11, 2026No Comments9 Mins Read
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    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्य के किसानों और मंडियों के लिए कई महत्वपूर्ण राहत उपाय सुनिश्चित किए। इस दौरान केंद्र ने पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए विशेष रेल गाड़ियां चलाने पर सहमति दे दी, जिससे रबी मंडीकरण सीजन से पहले राज्य में अनाज भंडारण संबंधी गंभीर संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

    इस हस्तक्षेप के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब पर बोझ बने संरचनात्मक मुद्दों के समाधान पर जोर दिया, जिसमें उच्च नकद ऋण ब्याज दरें, ग्रामीण विकास फंड के तहत लंबित 9,000 करोड़ रुपए, ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा और आढ़तियों की लंबे समय से लंबित मांगें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने इन मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सचिव स्तरीय व्यवस्था बनाने सहित ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।

    एक्स हैंडल पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा: “आज दिल्ली में मैंने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी जी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान हमने आढ़तियों की मांगों सहित पंजाब से संबंधित विभिन्न प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।”

    मुख्यमंत्री ने आगे लिखा: “बैठक के दौरान केंद्र के सामने महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए, जिसमें पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की तुरंत लिफ्टिंग तथा आरडीएफ के तहत बकाया 9,000 करोड़ रुपए की तुरंत अदायगी के मुद्दे शामिल थे। इसके साथ ही, नकद ऋण सीमा के तहत राज्यों पर लगाई गई उच्च ब्याज दरों को कम करने और आढ़तियों की केंद्र से संबंधित मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने की मांग की गई। इसके अलावा, मंडी मजदूरों के ईपीएफ से संबंधित मुद्दों को तुरंत हल करने की अपील की गई और असामयिक बारिश के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई।”

    उन्होंने आगे लिखा, “मुझे बेहद खुशी हो रही है कि केंद्रीय मंत्री जी ने इन सभी मुद्दों पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हम पंजाब के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

    फसलों के भंडारण संबंधी भारी कमी पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के कवरड गोदामों में 180.88 लाख मीट्रिक टन अनाज (151.20 लाख मीट्रिक टन चावल और 29.67 लाख मीट्रिक टन गेहूं) पहले से ही स्टोर किया गया है, जबकि कुल उपलब्ध कवरड भंडारण क्षमता लगभग 183 लाख मीट्रिक टन (173 लाख मीट्रिक टन कवरड गोदाम + 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं साइलो) है। नतीजतन, चावलों के लिए केवल 0.50 लाख मीट्रिक टन कवरड स्पेस और गेहूं के लिए 1.75 लाख मीट्रिक टन साइलो स्पेस उपलब्ध है।”

    उन्होंने कहा, “राज्य में 1 अप्रैल, 2026 से रबी मंडीकरण सीजन (आरएमएस) 2026-27 शुरू हो गया है, जिसमें संभावित रूप से 130-132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जाएगी।”

     

    मौजूदा स्टॉक के बोझ को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल के 38 लाख मीट्रिक टन गेहूं के स्टॉक में से लगभग 8.71 लाख मीट्रिक टन स्टॉक पहले ही राज्य में सीएपी या खुली स्टोरेज में पड़ा है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से भंडारण क्षमता की कमी हो गई है और लगभग 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं को कम अनुकूल परिस्थितियों में स्टोर करना पड़ेगा।

    अनाज की धीमी उठाई का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार लगातार गेहूं और चावल की राज्य से उठाई की मांग करती रही है ताकि चावल की खरीद और स्टोरेज के लिए जरूरी भंडारण क्षमता बनाई जा सके। हालांकि पिछले कई महीनों से राज्य से गेहूं और चावल की औसत उठाई प्रति माह केवल 5 लाख मीट्रिक टन रही है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि हर महीने कम से कम 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की उठाई की जाए या वैकल्पिक रूप से, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान आम लोगों को पेश मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत अनाज का वितरण बढ़ाने जैसे प्रबंध किए जाएं, जैसा कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि इससे रबी मंडीकरण सीजन 2026-27 के दौरान सुचारू खरीद कार्य सुनिश्चित होंगे और खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के लिए धान की मिलिंग को तेज किया जा सकेगा।

    एक अन्य मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खरीद के लिए फंडों का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह द्वारा किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्टेट बैंक जो ब्याज दर वसूल रहा है, वह भारतीय खाद्य निगम पर लागू रिकवरी दर से 0.5 प्रतिशत अधिक है और मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लगा रहा है।

    उन्होंने आगे कहा कि हालांकि भारत सरकार द्वारा हर सीजन के लिए जारी की गई अस्थायी लागत शीटों में राज्य को फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) की ब्याज दर पर केवल साधारण ब्याज की अनुमति है। नतीजतन पंजाब राज्य को हर सीजन में लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जिससे बचा जा सकता है।

     

    उन्होंने आगे कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्रीय वित्त मंत्री के पास भी उठाया है। तीसरा मुद्दा ग्रामीण विकास फंड से संबंधित है। हमने बार-बार कहा है कि हमारी मंडियों तक जाने वाली सड़कों के निर्माण की जरूरत है और हमने विधानसभा में एक बिल भी पास किया है जिसमें कहा गया है कि यह पैसा केवल मंडियों की मरम्मत, मंडियों के आधुनिकीकरण और मंडियों की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने इन फंडों का दुरुपयोग किया, जिसके कारण यह पैसा रोका गया है।

    उन्होंने आगे कहा कि हम इस मुद्दे पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं और मामला फिलहाल विचाराधीन है। मुकदमेबाजी को लंबा खींचने की बजाय केंद्र सरकार को पंजाब के जायज बकाए जारी कर देने चाहिए। यह पंजाब का हिस्सा है और पंजाब का हक है और हम केवल वही मांग रहे हैं जो हमारा जायज हक है।

    उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र के बजट में कोई रुकावट है तो फंड किस्तों में या किसी भी तरीके से जो उचित समझा जाए, जारी किए जा सकते हैं। लेकिन यह राशि अब 9000 करोड़ तक पहुंच गई है, जिसे अभी भी जारी नहीं किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमने इस मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया है और हमें भरोसा दिया गया है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में कोई व्यवस्था बनाने के लिए सचिव स्तर पर बैठक बुलाई जाएगी, जिसके माध्यम से यह फंड जारी होना शुरू हो जाएंगे।

    उन्होंने अपील की, “पंजाब को भारतीय खाद्य निगम की ब्याज दर के बजाय, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा नकद ऋण सीमा (सीसीएल) पर लगाए जाने वाले ब्याज दर के अनुसार मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लेने की अनुमति दी जाए।”

    आढ़तियों के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा यह है कि आढ़ती 2.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार ने अपना कमीशन मौजूदा दरों पर निर्धारित किया है।”

    आढ़तियों के कमीशन के मुद्दे पर विचार करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने आढ़तियों (कमीशन एजेंट) के कमीशन को खरीफ मार्केटिंग सीजन (केएमएस) 2020-21 के लिए धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल और रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2021-22 के लिए गेहूं के लिए 46.00 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया था।”

    उन्होंने आगे कहा, “उस समय से हर साल धान और गेहूं दोनों के लिए एक समान निर्धारित कमीशन जारी रखा गया है, जिसके कारण आढ़ती असंतुष्ट हैं और राज्य सरकार आढ़तियों का कमीशन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को लगातार लिख रही है।”

     

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय ने गेहूं के लिए 4.75 रुपये प्रति क्विंटल (46 रुपए से 50.75 रुपए) और धान के लिए 4.73 रुपये प्रति क्विंटल (45.88 रुपए से 50.61 रुपए) के कमीशन में मामूली बढ़ोतरी की है, जो आरएमएस 2026-27 से लागू होगी।” उन्होंने आगे कहा, “आढ़तियों द्वारा इस मामूली बढ़ोतरी को स्वीकार नहीं किया गया है और मांग की गई है कि पंजाब कृषि उत्पाद बाजार अधिनियम, 1961 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार, आढ़तियों का कमीशन एमएसपी के 2.5 प्रतिशत पर निर्धारित किया जाए।”

    उन्होंने अपील की, “भारत सरकार को डीएफपीडी के माध्यम से आढ़तियों के कमीशन में इस मामूली बढ़ोतरी की समीक्षा करनी चाहिए और पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1961 के अनुसार एमएसपी के 2.5 प्रतिशत की दर से कमीशन को मंजूरी दी जानी चाहिए।”

     

    एक अन्य चिंता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले कई सालों से, भारतीय खाद्य निगम ईपीएफ से संबंधित मुद्दों के कारण हर सीजन में खरीदी जाने वाली फसलों के लिए भुगतान किए जाने वाले मंडी लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रख रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “इसके परिणामस्वरूप, आढ़तियों से संबंधित लगभग 50 करोड़ रुपए की राशि एफसीआई के पास पड़ी है, जिससे उनका वित्तीय बोझ और बढ़ गया है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य की एजेंसियां आढ़तियों से अंडरटेकिंग या हलफिया बयान प्राप्त करने के बाद उन्हें भुगतान कर रही हैं, जिसमें कहा गया है कि यदि ईपीएफ अधिकारियों द्वारा कोई देनदारी निर्धारित की जाती है, तो आढ़ती इसे पूरा करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए ईपीएफ के हिसाब से लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रखना किसी भी तरह उचित नहीं है।” केंद्रीय मंत्री से अपील की कि वे एफसीआई को राज्य एजेंसियों की तरह हलफिया बयान लेकर भुगतान जारी करने के निर्देश दें।

    राष्ट्रीय खाद्य खरीद प्रणाली में पंजाब की प्रमुख भूमिका को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने, किसानों के हितों की रक्षा करने और राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र द्वारा इन मुद्दों पर समय पर हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

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